आयुर्वेद में चर्म रोगों का सफल ईलाज है, आयुर्वेद मतानुसार चर्मरोग रक्त दुष्टि या खून की खराबी की वजह से होते हैं, इसलिए चर्मरोगों में रक्त शोधक या खून को साफ़ करने वाली दवाएं दी जाती हैं
महा मंजिष्ठारिष्ट खून साफ़ कर रक्त विकारों को दूर करने वाली आयुर्वेद की महान दवाओं में से एक है
यहाँ मैं बता देना चाहूँगा कि इसकी कई वैरायटी है जैसे महा मंजिष्ठारिष्ट, महा मंजिष्ठा काढ़ा और महा मंजिष्ठादी क्वाथ
ये सभी का कम्पोजीशन लगभग सेम है और फ़ायदा भी. बस निर्माण विधि में फर्क होता है
महा मंजिष्ठारिष्ट का मुख्य घटक मंजिष्ठा या मंजीठ नाम की जड़ी है और इसके अलावा इसमें 40 से ज़्यादा तरह की रक्तशोधक जड़ी-बूटियों का मिश्रण है
आईये जानते हैं महा मंजिष्ठारिष्ट के फ़ायदे के बारे में -
यह पूरी तरह से आयुर्वेदिक दवा है जिसके इस्तेमाल से खून साफ़ होकर हर तरह के चर्मरोग या स्किन डिजीज ठीक हो जाते हैं
फोड़ा-फुंसी, दाद, एक्जिमा से लेकर सोरायसिस जैसे जटिल रोग में भी इसके इस्तेमाल से फ़ायदा होता है
चेहरे पर होने वाले दाग धब्बे और किल मुहांसों को दूर करता है और त्वचा को नर्म और मुलायम बनाता है
पित्त दोष को शांत करता है, शरीर में होने वाली जलन, हथेली और तलवों में होने वाली जलन को दूर करता है
छोटे से छोटे चर्म रोगों से लेकर बड़े चर्मरोग जैसे कुष्ठरोग तक में इसका प्रयोग किया जाता है
महा मंजिष्ठारिष्ट की मात्रा और सेवन विधि-
2 से 4 चम्मच तक एक कप पानी मिलाकर खाना खाने के बाद दिन में दो बार लेना चाहिए, यह एक व्यस्क व्यक्ति की मात्रा है, बच्चों को कम मात्रा में देना चाहिए
महा मंजिष्ठारिष्ट, महा मंजिष्ठा काढ़ा या महा मंजिष्ठा क्वाथ जो भी मिल जाये यूज़ कर सकते हैं, सभी का फ़ायदा सेम है
महा मंजिष्ठारिष्ट के साथ कैशोर गुगुल और पंचनिम्बादी चूर्ण साथ से लेने चर्म रोगों में अच्छा फ़ायदा होता है
महा मंजिष्ठारिष्ट पूरी तरह से सुरक्षित आयुर्वेदिक दवा है, किसी तरह का कोई साइड इफ़ेक्ट नहीं है, लम्बे समय तक प्रयोग कर सकते हैं, कठिन चर्मरोगों में इसे 6 महिना से एक साल तक प्रयोग करना चाहीये
तो दोस्तों, ये थी आज की जानकारी रक्त शोधक आयुर्वेदिक दवा महा मंजिष्ठारिष्ट के फ़ायदे और इस्तेमाल के बारे में
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