केला को कौन नहीं जानता? दुनियाभर में लोग इस फल को खाते हैं. विधिपूर्वक इसके सेवन से आप कई बीमारियों में लाभ ले सकते हैं. तो आइये जानते हैं कि केला किस तरह से प्रयोग कर किन-किन बीमारियों को आप दूर कर सकते हैं और साथ में यह भी जानेंगे कि कौन से रोगों में केला का सेवन नहीं करना चाहिए.
दोस्तों, केला का चिकित्सकीय महत्त्व भी है, अगर आप इसे सही से यूज़ करेंगे तो कई सारी बीमारियों में इसका लाभ ले सकते हैं. केले का फूल या कदली पुष्प कुछ आयुर्वेदिक औषधियों के घटक के रूप में भी प्रयोग किया जाता है. इसके औषधीय गुणों के कारन ही इसके फूल, फल और स्तम्भ की सब्ज़ी भी बनायी जाती है. बिना केमिकल वाला पेड़ में पका हुआ केला ही उत्तम माना गया है.
केला किसी परिचय का मुहताज नहीं है, आप की जानकारी के लिए भाषा भेद से इसका नाम बता देता हूँ-
संस्कृत में – कदली, वारणा, मोचा, अम्बुसार, रम्भा, वन लक्ष्मी, ग्रंथनी, महाफला कहा जाता है.
हिन्दी में- केला, केरा
गुजराती में – केलूं
मराठी में- कल, सोनकेल
बांग्ला में – कला, केला
अंग्रेज़ी में -बनाना, प्लानटेन और
लैटिन में – मुसा पेरेडीसियाका नाम से जाना जाता है.
केला में पोटाशियम, कैल्शियम, विटामिन सी, विटामिन बी कॉम्प्लेक्स और महत्त्वपूर्ण एंजाइम इत्यादि पाए जाते हैं.
आईये अब जानते हैं केला औषधीय प्रयोग
ल्यूकोरिया या सफ़ेद पानी की समस्या में –
एक पका लेकर छिलकर मसलकर इसमें एक स्पून देसी घी मिलाकर सुबह-शाम खाने से सफ़ेद पानी की समस्या में लाभ होता है.
रक्त प्रदर में –
पका केला को दूध में मसलकर खाते रहने से लाभ होता है. एक पका केला में एक चम्मच आँवला का रस और शहद मिक्स कर खाने से दोनों प्रकार के प्रदर रोग में लाभ होता है.
छोटे बच्चों के दस्त में –
पके केले को मसलकर चटाना चाहिए.
पुरुष रोगों में –
पके केला में घी मिलाकर खाने से धातुक्षीणता दूर होती है. पका केला खाकर गर्म मीठा दूध पीने से कमज़ोरी दूर होती है और शरीर पुष्ट होता है. सम्भोग के बाद केला खाकर गर्म दूध पीने से कमज़ोरी नहीं आती.
पका केला में मुक्ताशुक्ति भस्म 150 मिलीग्राम और शतावर और विदारीकन्द का चूर्ण 5-5 ग्राम मिलाकर खाने से स्वप्नदोष की समस्या दूर होती है.
प्रमेह रोग में –
भोजन के बाद शहद के साथ केला मिलाकर खाने से लाभ होता है.
बहुमूत्र में –
अधपके केले को आग में भुनकर इसमें पिसा हुआ तिल और शहद मिलाकर खाने से बहुमूत्र रोग में लाभ होता है.
लिवर-स्प्लीन और गुल्म रोग में –
पके केले में 5 बून्द कच्चे पपीते का दूध मिक्स कर भोजन के बाद सुबह-शाम खाने से बढ़ा हुआ लिवर-स्प्लीन और गुल्म रोग में लाभ होता है.
- पके केले में मिश्री मिलाकर खाने से पेचिश ठीक होती है.
- पके केले में दही मिलाकर खाने से दस्त, पेचिस और संग्रहणी में लाभ होता है.
- पका केला को उबालकर खाने से कब्ज़ की समस्या दूर होती है.
पके केले को घी के साथ खाने से पित्त विकार दूर होते हैं. पित्त विकारों में कच्चे केले की सब्ज़ी खानी चाहिए, बिना मिर्च मसाला के. केला को मिश्री मिले दूध के साथ खाने से रक्तपित्त में लाभ होता है.
दिल और दिमाग की कमज़ोरी में –
एक पके केले को मसलकर उसमे एक चम्मच शहद और 250 मिलीग्राम अकीक पिष्टी मिलाकर सुबह-शाम खाना चाहिए. इस से दिल और दिमाग की कमज़ोरी दूर होती है.
श्वास रोग या अस्थमा में –
एक केला लेकर उसका छिल्का हटाये बिना छेदकर उसमे 10 दाना काली मिर्च घुसाकर रात भर रहने दें और सुबह इसे आग में भुनकर कालीमिर्च सहित चबाकर खाने से अस्थमा में लाभ होता है.
संग्रहणी में –
केले के स्तम्भ का रस 25 ML लेकर इसमें सौंफ़, धनिया, जीरा और मिश्री का सम्भाग चूर्ण मिलाकर सेवन करने से संग्रहणी रोग में आराम होता है.
रक्ताल्पता या खून की कमी होने पर –
25 ML केले के स्तम्भ का रस, 5 ग्राम आँवला चूर्ण और लौह भस्म दो रत्ती मिलाकर शहद के साथ सेवन करना चाहिए.
पेट में कीड़े होने पर –
केले की जड़ के रस में विडंग चूर्ण मिलाकर सेवन करना चाहिए
हिचकी होने पर-
केले के पत्तों को जलाकर राख बना लें, इसक राख की थोड़ी से मात्रा लेकर शहद मिक्स कर चाटने से हिचकी बन्द हो जाती है.
कुकुर खाँसी में –
केले के पत्तों की राख को शहद के साथ बच्चों को चटाना चाहिए.
नासूर में –
केले के हरे पत्तों को पीसकर इसकी पट्टी बाँधते रहने से नाड़ी व्रण या नासूर ठीक हो जाता है.
कान दर्द होने पर –
केले के गाभ के रस को गर्म कर इस की कुछ बूँदें कान में डालना चाहिए.
पत्थरी में –
केले के गाभ के रस में यवक्षार और आपामार्ग क्षार मिलाकर सेवन करने से लाभ होता है.
इस तरह से केले के अनेकों प्रयोग हैं जिनका विधिपूर्वक सेवन करने से लाभ होता है.
आईये अब जानते हैं केला सेवन की सावधानियाँ
कभी भी अधीक मात्रा में केला का सेवन न करें. अधीक केला खाने से बदहज़मी हो गयी हो तो छोटी इलायची का सेवन करें.
केला खाने के तुरन्त बाद पानी नहीं पीना चाहिए. ठण्डी तासीर या कफ़ प्रकृति वाले लोगों को केला नहीं खाना चाहिए.
गैस रोगी और कमज़ोर पाचन शक्ति वालों को भी केला नहीं खाना चाहिए.
केला को भोजन के साथ या भोजन के बाद ही खाना चाहिए, कभी भी ख़ाली पेट केला नहीं खायें.
तो दोस्तों, यह थी आज की जानकारी केला के औषधिय प्रयोग के बारे में.